आल्हा
बुंदेलखंड की वीर भूमि महोबा और आल्हा एक दूसरे के पर्याय हैं। महोबा की सुबह आल्हा से शुरू होती है और उन्हीं से खत्म। बुंदेलखंड का जन-जन आज भी चटकारे लेकर गाता है-
बुंदेलखंड की सुनो कहानी बुंदेलों की बानी में
पानीदार यहां का घोडा, आग यहां के पानी में
महोबा के ढेर सारे स्मारक आज भी इन वीरों की याद दिलाते हैं। सामाजिक संस्कार आल्हा की पंक्तियों के बिना पूर्ण नहीं होता। आल्ह खंड से प्रभावित होता है। जाके बैरी सम्मुख ठाडे, ताके जीवन को धिक्कार । आल्हा का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि 800 वर्षो के बीत जाने के बावजूद वह आज भी बुंदेलखंड के प्राण स्वरूप हैं। आल्हा
आल्हा गायक इन्हंे धर्मराज का अवतार बताता है। कहते है कि इनको युद्ध से घृणा थी और न्यायपूर्ण ढंग से रहना विशेष पसंद था । इनके पिता जच्छराज (जासर) और माता देवला थी। ऊदल इनका छोटा भाई था। जच्छराज और बच्छराज दो सगे भाई थे जो राजा परमा के यहाॅ रहते थे। परमाल की पत्नी मल्हना थी और उसकी की बहने देवला और तिलका से महाराज ने अच्छराज और बच्छराज की शादी करा दी थी। मइहर की देवी से आल्हा को अमरता का वरदानल मिला था। युद्ध में मारे गये वीरों को जिला देने की इनमें विशेशता थी। लाार हो कर कभी-कभी इन्हें युद्ध में भी जाना पड़ता था। जिस हाथी पर ये सवारी करते थे उसका नाम पष्यावत था। इन का विवाह नैनागढ़ की अपूर्व सुन्दरी राज कन्या सोना से हुआ था। इसी सोना के संसर्ग से ईन्दल पैदा हुआ जो बड़ा पराक्रमी निकला। शायद आल्हा को यह नही मालूम था कि वह अमर है। इसी से अपने छोटे एवं प्रतापी भाई ऊदल के मारे जाने पर आह भर के कहा है-
पहिले जानिति हम अम्मर हई,
काहे जुझत लहुरवा भाइ ।
(कहीं मैं पहले ही जानता कि मैं अमर हूँ तो मेरा छोटा भाई क्यों जूझता)
ऊदल
यह आल्हा का छोटा भाई, युद्ध का प्रेमी और बहुत ही पतापी था। अधिकांष युद्धों का जन्मदाता यही बतलाया जाता है। इसके घेड़े का नमा बेंदुल था। बेंदुल देवराज इन्द्र के रथ का प्रधान घोड़ा था। इसक अतिरिक्त चार घोड़े और इन्द्र के रथ मंे जोते जाते थे जिन्हंे ऊदल धरा पर उतार लाया था। इसकी भी एक रोचक कहानी है। - ‘‘कहा जाता है कि देवराज हन्द्र मल्हना से प्यार करता था। इन्द्रसान से वह अपने रथ द्वारा नित्ःय र्ही आ निषा में आता था। ऊदल ने एक रात उसे देख लिया और जब वज रथ लेकर उ़ने को जुआ, ऊदल रथ का धुरा पकड़ कर उड़ गया। वहां पहुंच कर इन्द्र जब रथ से उतरा, ऊदल सामने खड़ा हो गया। अपनल मार्यादा बचाने के लिए इन्द्र ने ऊदल के ही कथ्नानुसार अपने पांचों घोडे़ जो उसके रथ में जुते थे दे दिये। पृथ्वी पर उतर कर जब घोड़ों सहित गंगा नदी पार करने लगा तो पैर में चोट लग जाने के कारण एक घोड़ा बह गया। उसका नाम संडला था और वह नैनागढ़ जिसे चुनार कहते है किले से जा लगा। वहां के राजा इन्दमणि ने उसे रख लिया। बाद में वह पुनः महोबे को लाया गया और आल्हा का बेटा ईन्दल उस पर सवारी करने लगा।
ऊदल वीरता के साथ-साथ देखने में भी बड़ा सुनछर था। नरवरगढ़ की राज कन्या फुलवा कुछ पुराने संबंध के कारण सेनवा की षादी मं्रंे नैनागढ़ गयी थी। द्वार पूजा के समय उसने ऊदल को दख तो रीझ गयी। अन्त में कई बार युद्ध करने पर ऊदल को उसे अपनल बनाना पड़रा। ऊदल मं धैर्य कम था। वह किसी भी कार्य को पूर्ण करने के हतु शीघ्र ही शपथ ले लेता था। फिर भी अन्य वीरों की सतर्कता से उसकी कोई भी प्रतिज्ञा विफल नही हुई। युद्ध मंे ही इसका जीवन समाप्त हो गया। इसका मुख्य अस्त्र तलवार था।
ब्रहा्रा
यह परमाल का बेटा था। इसकी शादी दिल्ली के महाराज पृथ्वीराज को परम सुन्दी कन्या बेला (बेलवा) से हुई थी थी। पाठकों को यह नही भूलना चाहिए कि महोबी जाति के उतार थे। अतः इनके यहां कोई भी अपनी कन्या को शादी करने में अपना अपमान समझता था। यही कारण था जो ये लोग अपनी शादी में भीषण युद्ध किया करते थे। सत्य तो यह है कि यदि ये अपने राज्य विस्तार के लिए इतना युद्ध करते तो निष्चय ही चक्रवर्ती राजा हो जाते। ब्राहा्रा का ब्याह भी इसी प्रकार हुआ था। कई दिनों तक घोर युद्ध करना पड़ा। इसके गौने में तो सभी वीर मार डाले गये। आल्हा काल की यह अन्तिम लड़ाई मानी जाती है जिसमें अमर होने के नाते केवल आल्हा ही बच पाये थे। ब्राह्राा भी वीर गति को प्राप्त हुआ और उसकी नयी नवेली बेलवा अपने पति के शव के साथ जल के मर गयी। ‘आल्हा’ गायक निम्न पंक्तियां बड़े दुःख के साथ गाता हू-
सावन सारी सोनवा पहिरे,
चैड़ा भदई गंग नहाइ।
चढ़ी जवानी ब्रहा्रा जूझे
बेलवा लेइ के सती होइ जाइ।
(सावन में सोना साड़ी पहनती थी, चैड़ा भादों मंे गंगा नहाता था। चढ़ती जवानी में ब्रहा्रा जूझ जाता है और उसे लेकर बेलवा सती हो जाती है।)
मलखान
बच्छराज के जेठे पुत्र का नाम मलखान था। यह बड़ा ही शक्तिशाली था। कहते ह कि यह जिस रथ पर सवारी करता था उसमंे 17 घोड़े जोते जाते थे। उस समय उसके दोनों जंघे पर सौ-सौमन क लम्बे-लम्बे लोहे के खम्भे खड़े कर दिये जाते थे। इनकी संख्या दो होती थी और वह युद्ध में इन्हीं से वार किया करता था। रथ के भार से भूमि नीचे बैठ जाया करती थी। युद्ध में इनका रथ सबसे पीछे रख्चाा जाता था। इनके प्रताप को आल्हा की दो पंक्तियां बताती है-
लूझि लगावन के डेरिया हो,
खंभा टेकन के मलखान।
(झगड़ा लगाने के लिए डेरिया और मुर्चा लेने के लिए मलखान था)
मलखान का ब्याह पानीपत के महाराज मधुकर सिंह की कन्या जगमोहन से हुआ था। इस ब्याह में भी महोबी वीरां को खूब लड़ाई लड़नी पड़ी थी। जगमोहन का भाई नवमंडल इतना योद्धा था कि महोबियों की हिम्मत रह-रह के छूट जाती थी। स्वयं ऊदल कई बार मूर्छित हो उठा था। नवमंडल के प्रति आल्हा की चार पंक्तियां इस प्रकार हैं-
नौ मन तेगा नउमंडल के,
साढ़े असी मने कै साँग
जो दिन चमकै जरासिंध में
क्षत्रों छोड़ि धरैं हथियार ।
(नवमंडल का नौ मन का तेगा और साढ़े अस्सी मन की साॅग थी। जिस दिन जरासिंध क्षेत्र में वे चमक जाते थे क्षत्री अपना अपना हथियार डाल देते थे।)
मलखान उसक मोर्चा थाम सका। वरदान के कारण पाँवांे के तलवे को छोड़ उसकी सारी शरीर अष्टधातु की हो गयी थी। उसके शरीर से किसी प्रकार का वार होने पर आग की चिनगारियां निकलने लगती थी। इसकी मृत्यु तभी हुई जब कि धोखे मंे जगमोहन ने बैरी को अपने पति के तलवे में प्राण रहने की बात बता दी।
सुलखान
सुलखान आल्हा में अंगद के नाम से गाया गया है। यह मलखान का छोटा भाई था। युद्ध काल में मलखान के रथ को यही हाॅकता था। मलखान के पराक्रम का श्रेय इसी को है। रथ को लेकर अभी आकाश मंे उड़ जाता था तो कभी बैरियों के दल में कूद पड़ता था। कही-कहीं इसे भगवान कृष्ण की भी संज्ञा मिली है। इसके अतिरिक्त उसे युद्ध कला का भी अच्छा ज्ञान था।
जगनी
जिस दल का सम्पूर्ण जीवन ही युद्धमय रहा उसमें एक कुशल दूत का होना भी आवश्यक था। ऐसे कार्यो के लिए जगनी अपने दल में आवश्यकता पड़ने पर यह सन्द्रश पहुंँचाया करता था। आल्हा मंे इसके लिए धावनि (दूत) शब्द का भी प्रयोग किया गया है। इसकी चाल घोड़े से भी कई गुने तेज थी। दूसरे के मन की बातें जान लेना था और भविष्य की बातें भी बता देता था। राह में चलते हुए यदि महोबी वीर कहीं युद्ध में फँस जाते थे तो राज्य में खबर ले जाने का कार्य जगनी को ही सांैपा जाता था।
सुखेना
तेलो सुखेना तलरी गढ़ के
जे घटकच्छे कइ अवतार।
(सुखेना जाति का तेली और तिलरी गढ़ का रहने वाला तथा घटोत्कच्छ का अवतार था।)
सबसे बड़ी बात यह थी जो उसे 12 जादू और 16 मोहिनी का अच्छा ज्ञान था। उस समय जादू की भी लड़ाई हुआ करती थी। आल्हा की पत्नी सोनिवां भी जादू में माहिर थी।ऐसे समय में सुखेना का रहना आवश्यक था। इसने कई बार अपने दल को दुश्मनों द्वारा चलाये गये जादू से मुक्त किया था।
डेरिया
डेरिया ऊदल का सच्चा साथी, जाति का ब्राहा्रण था। पेचेदे मामलों से इसकी सूझ-बूझ सर्वथा ग्रहणीय होती थी। यह एक अनोखा जासूस था, जिसे बावनों किलो का भेद भली-भांति मालूम था। ऊदल की तरह यह उदकी नही था बल्कि बहुत सोच-समझ कर कदम उठाता था। इसके लिए कभी-कभी ऊदल नाराज भी हो जाता था। कुछ आल्हा गायक डेरिया के लिए ढेवा षब्द का भी प्रयोग करते है। परन्तु डेरिया और ढेबा दो सगे भाई थे जो पियरी के राजा भीखम तेवारी के लड़के थे। एक दिन दोनों पिता से आज्ञा ले विदेष को निकल पड़े । कुछ दूर आकर दोनों, जान-बूझकर दो रास्ते पर हो लिये। इसप्रकार डेरिया महोबा पहुंचा और ढेबा लोहगाजर। डेरिया हंशा नामक घोड़े पर सवारी करता था जो इन्द्र के घोड़े मंे से एक था। इसे डेरिइया भी कहा जाता है। ऊदल को डेरिया पर गर्व था। संकटकाल मंे वह इसीको पकाराता था। यह देवो का परम भक्त था और देवी इसे इष्ट भी थी।
लाखन
महोबे की बढ़ती हुई धाक देख जहां दूसरे राजा जलते थे वही लाखन एक राजा होते हुए भी महोबे की ओर से लड़ता था। यह कन्नौज के महाराज जयचंद्र का लड़का था। इसकी 160 रानियाँ थी। ऊदल से इसकी मित्रता हो गयी थी और उसी के साथ महोबे केू लिए सदा लड़ता रहा सी मंे उसकी मृत्यु भी हो गयी। ऊदल के साथ-साथ रहने से आल्हा की पंक्तियों में भी दोनों के साथ साथ समेटा गया है। नीचे की दो पंक्तियां इसकी वीरता मंे तथा ऊदल की सहचारिता मे कम नही होगी-
लाखन लोहवा से भुइ हालै,
अउ उदले से दऊ डेराइं।
(लाखन के लोहेग से पृथ्वी दहल जाती थी और ऊदल से तो परमात्मा ही डरते है।)
सैयद
वृद्धावस्था में कुशलता से युद्ध में जुझाने वाला सैयद ही था। इसका पूरा नाम बुढ़वा सैयद ही था। इसका पूरा नाम बुढ़वा सैयद था और यह वाराणसी का रहने वाला था। इसे महोबे का मन्त्री कहा गया है और अन्यान्य स्थलों पर इसकी सूझ-बूझ एवं मन्त्रणा से महोबे एवं महोबियों की काफी रक्षा हुई।
भगोला और रूपा
(अहिर भगोला भागलपुर के) यह भागलपुर का एक अहीर था। इसकी शारीरिक शक्ति का ‘आल्हा’ में खूब बखान किया गया है। कहते है कि युद्ध में यह मोटे-मोटे पेड़ उखाड़ कर लड़ता था। इससे डर कर कितने बैरी भाग भी जाते थे। रूपा जाति का बारी था। युद्ध-निमन्त्रण की चिट्ठियाँ यही पहुँचाया करता था। अतः पहला मोर्चा भी इसी को लेना पड़ता था। इससे वह बैरियों की शक्ति भी सहज ही आजमा लेता था। उक्त बारहों वीरों के पराक्रम का परिणाम जो हुआ कुछ अंश में निम्न पक्तियाँ बताती हैं, जिन्हें ऊदल ने ही अपने मुख से कहा है-
पूरब ताका पुर पाटन लगि
और पश्चिम तकि विन्द पहार,
हिरिक बनारस तकि तोरा धइ
केउना जोड़ी मोर देखान।
अन्तः आल्हा तो अमर माने जाते है शेष सभी वीरों का अन्त ब्रहा्रा के गौने में पृथ्वीराज के प्रतापी पुत्र चैड़ा के हाथ हुआ। चैड़ा के हाथ इनकी मृत्यु भी लिखी थी, आल्हा मंे ऐसा गाया जाता है।
should bundelkhand become separate State vote and give your opinion on http://www.bundelkhanddarshan.com/ Pramod Rawat Tikamgarh
Monday, August 22, 2011
Friday, August 19, 2011
बुंदेलखंड पैकेज को लेकर राज्यसभा में हंगामा
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। बदहाली के शिकार बुंदेलखंड पर उत्तर प्रदेश और केंद्र का झगड़ा राज्यसभा में भी गूंजा। बसपा और कांग्रेस आपस में भिड़ गई। बसपा ने कहा कि विशेष पैकेज के तहत उसका पूरा धन 'अतिरिक्त केंद्रीय सहायता' के रूप में मिलना चाहिए। उसने केंद्र सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। सरकार ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की तो बसपा और भाजपा सदस्यों ने इतना हंगामा मचाया कि प्रश्नकाल तय समय से पहले ही खत्म करना पड़ गया।
बसपा के गंगाचरण राजपूत ने गुरुवार को राज्यसभा में बुंदेलखंड को केंद्र से मिले विशेष पैकेज का मामला प्रश्नकाल में उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2009 में बुंदेलखंड के लिए 7266 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का एलान तो कर दिया, लेकिन दे नहीं रही है। पैकेज में से 3506 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड को व 3760 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को मिलने थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 200 करोड़ रुपये अलग से देने की घोषणा की थी। सरकार से अभी तक उत्तर प्रदेश को सिर्फ 1696 करोड़ व मध्य प्रदेश को 1954 करोड़ रुपये केंद्रीय अतिरिक्त सहायता के रूप में मिल सके हैं। बाकी धन को उसने चल रही विभिन्न योजनाओं के मद में डाल दिया है। सरकार साफ बताए कि पैकेज का पूरा धन वह केंद्रीय अतिरिक्त सहायता के मद में देगी या नहीं?
योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने जवाब में कहा कि सिर्फ केंद्रीय अतिरिक्त सहायता को ही विशेष पैकेज नहीं माना जाना चाहिए। मंत्री के इतना कहते ही बसपा सदस्य अपनी जगहों पर खड़े होकर विरोध करने लगे। उसी बीच भाजपा के विनय कटियार, कलराज मिश्र और दूसरे सदस्य भी सरकार का विरोध करने लगे। शोर-शराबे के बीच ही गंगाचरण राजपूत ने सरकार से बुंदेलखंड में उद्योगों को लगाने के लिए उत्पाद शुल्क व आयकर में छूट दिए जाने के लिए सरकार के रुख के बारे में दूसरा प्रश्न पूछा। लेकिन हंगामे के चलते सरकार की तरफ से जवाब नहीं आ सका। सभापति मुहम्मद हामिद अंसारी ने सदस्यों को शांत कराने व प्रश्नकाल जारी रखने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। हंगामा न थमते देख सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। उस समय प्रश्नकाल में लगभग सात मिनट बाकी थे।
मनमाने तरीके से खर्च
हो रहा पैकेज का धन
नई दिल्ली [जाब्यू]। बुंदेलखंड पैकेज का धन मिलने में देरी को लेकर उत्तर प्रदेश को केंद्र से शिकायतें भले ही हों, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि वहां परियोजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है। ठेकेदारों को मनमाने तरीके से भी काम दिए गए हैं। टेंडर की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। घटिया काम कराए गए हैं। यहां तक कि पेयजल के लिए हैंडपंप वहां नहीं लगाए गए, जहां लगने चाहिए थे।
केंद्रीय योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्र को मिली इन शिकायतों को जरूरी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को भेज दिया गया है। इसके अलावा योजनाओं की प्रगति की मॉनीटरिंग योजना आयोग की निगरानी समिति भी कर रही है। जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यसचिव व संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
बसपा के गंगाचरण राजपूत ने गुरुवार को राज्यसभा में बुंदेलखंड को केंद्र से मिले विशेष पैकेज का मामला प्रश्नकाल में उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2009 में बुंदेलखंड के लिए 7266 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का एलान तो कर दिया, लेकिन दे नहीं रही है। पैकेज में से 3506 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड को व 3760 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को मिलने थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 200 करोड़ रुपये अलग से देने की घोषणा की थी। सरकार से अभी तक उत्तर प्रदेश को सिर्फ 1696 करोड़ व मध्य प्रदेश को 1954 करोड़ रुपये केंद्रीय अतिरिक्त सहायता के रूप में मिल सके हैं। बाकी धन को उसने चल रही विभिन्न योजनाओं के मद में डाल दिया है। सरकार साफ बताए कि पैकेज का पूरा धन वह केंद्रीय अतिरिक्त सहायता के मद में देगी या नहीं?
योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने जवाब में कहा कि सिर्फ केंद्रीय अतिरिक्त सहायता को ही विशेष पैकेज नहीं माना जाना चाहिए। मंत्री के इतना कहते ही बसपा सदस्य अपनी जगहों पर खड़े होकर विरोध करने लगे। उसी बीच भाजपा के विनय कटियार, कलराज मिश्र और दूसरे सदस्य भी सरकार का विरोध करने लगे। शोर-शराबे के बीच ही गंगाचरण राजपूत ने सरकार से बुंदेलखंड में उद्योगों को लगाने के लिए उत्पाद शुल्क व आयकर में छूट दिए जाने के लिए सरकार के रुख के बारे में दूसरा प्रश्न पूछा। लेकिन हंगामे के चलते सरकार की तरफ से जवाब नहीं आ सका। सभापति मुहम्मद हामिद अंसारी ने सदस्यों को शांत कराने व प्रश्नकाल जारी रखने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। हंगामा न थमते देख सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। उस समय प्रश्नकाल में लगभग सात मिनट बाकी थे।
मनमाने तरीके से खर्च
हो रहा पैकेज का धन
नई दिल्ली [जाब्यू]। बुंदेलखंड पैकेज का धन मिलने में देरी को लेकर उत्तर प्रदेश को केंद्र से शिकायतें भले ही हों, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि वहां परियोजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है। ठेकेदारों को मनमाने तरीके से भी काम दिए गए हैं। टेंडर की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। घटिया काम कराए गए हैं। यहां तक कि पेयजल के लिए हैंडपंप वहां नहीं लगाए गए, जहां लगने चाहिए थे।
केंद्रीय योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्र को मिली इन शिकायतों को जरूरी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को भेज दिया गया है। इसके अलावा योजनाओं की प्रगति की मॉनीटरिंग योजना आयोग की निगरानी समिति भी कर रही है। जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यसचिव व संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
Wednesday, August 10, 2011
बुंदेलखंड में भरोसे की चक्की में पिसते किसान
| भरोसे की चक्की में पिसते किसान |
| प्रणव सिरोही / बांदा August 09, 2011 |
पैकेज के तहत किसानों को मुफ्त बीज और खाद की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन पिछले वर्ष कई ऐसे बीज बांट दिए गए जिनसे फसल ही नहीं उगी। किसान आसा राम बताते हैं कि वे 'पेटेंटÓ बीज थे, जिनसे दोबारा फसल नहीं हो पाती क्योंकि उनसे फसल पहले ही ली जा चुकी थी। जब कोहराम मचा तो प्रशासन ने कुछ कार्यवाही का भरोसा जताया लेकिन फसल बीमा के नाम पर भी किसानों को कोई राहत नहीं मिली क्योंकि केवल प्राकृतिक आपदा की स्थिति में ही यह लाभ मिलता है।
पाले से नष्टï हुई दलहन फसलों के मामले में भी ऐसा ही हुआ। तब भी किसान मुआवजे से महरूम रह गए। हालांकि किसानों के लिए एक अच्छी है कि पाले को भी जल्द ही प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में लिया जा सकता है और कृषि मंत्री शरद पवार इस मसले को कैबिनेट की मंजूरी दिलाने की कोशिशों में लगे हैं। किसान क्रेडिट कार्ड का भी कोई फायदा नहीं नजर आ रहा है। आमदनी नहीं होने के कारण कर्ज अदा नहीं हो पाता ऐसे में किसान को जमीन ही गंवानी पड़ती है। पटेल कहते हैं, 'पैकेज में मंडियों के निर्माण के लिए भारी खर्च किया जा रहा है जबकि उत्पादकता बढ़ाने पर कोई जोर नहीं हैं। जब उत्पादन नहीं होगा तो मंडियां कैसे गुलजार होंगी। किसानों को जब तक सीधे मदद नहीं मिलेगी, तो उनका भला नहीं होगा।
Wednesday, October 6, 2010
प्रधानों के आगे फीकी पड़ रही है महानगरों की चमक-दमक
बुन्देलखण्ड के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से रोजी-रोटी की तलाश में महानगरों में रहने वाले ग्रामीणों को प्रधानी का मोह सताने लगा है। ग्राम प्रधान क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के ओहदेदार पदों के आगे अब उन्हेें महानगरों की चमक-दमक फीकी लगने लगी है इसीलिये अनेक लोग अपने बीबी, बच्चों केा लेकर गांव वापस आ रहे है और प्रधानी से लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य का पर्चा भर रहे है। जहां महिलाअों के लिये आरक्षित सीट है और वे स्वयं चुनाव नही लड़ सकते वहां अपनी -अपनी पित्नयों या अन्य रिश्तेदारों को चुनाव लड़ज्ञ रहे हैं।
बांदा जिले महुआ किवास खण्ड के अन्तर्गत पनगार सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है जहां ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा हैं। पनगरा ग्राम पंचायत विभिन्न पदों के आरक्षण के अनुसार अनुसूचित जाति महिला के लिये आरक्षित है जिसमें गॉव मे स्थायी रहने वाले लोगों के अलावा कई ऐसे उम्मीदवार अपनी-अपनी पित्नयों को खड़ा किये है जो वशोZ से दिल्ली, पंजाब और सूरत में रोजी रोटी कमाने के लिये गये थे और वही बस गये।
पनगरा ग्राम पंचायत में पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिये कुल 22 महिलायें प्रधान पद की उम्मीदवार है जिसमें सबसे अधिक 8 प्रत्याशी चमार बिरादरी क है, 6-6 प्रत्याशी कोरी और धोबी बिरादरी के तथा 2 प्रत्याशी वाल्मीक समाज के है। इनमें सबसे अधिक संघशZ कोरी विरादरी में है। दसियों साल से दिल्ली में सपरिवार रहने वाले रामेश्वर कोरी विरादरी के ही है जो चुनाव लड़ने के लिये बच्चों सहित आ गये है और प्रधान पद के लिये अपत्नी को उम्मीदवार बना दिया हैं। ओमप्रकाश उर्फ मुन्ना पनगरा के चलते पुर्जा और समाज में अच्छी पैठ रखने वाले बाकर का नाती है जो कानपुर, बम्बई, सूरत घूमता रहा है और चुनाव के आकशZण में गॉव आ गया है।
कोरी बिरादरी को ब्राहा्रण समाज का समर्थन मिलने के कारण नत्थू की पत्नी सुन्दी की स्थिति काफी सुदृढ़ दिखायी देती है जो `बाकर´ के छोटे भाई जमुना प्रसाद का लड़का है। अन्य उम्मीदवारों में िशवप्रसाद पुत्र रामटहलू (बाकर के बहिने के नाती) रामकिशुन बाकर के अन्य बहिन के लड़के के दमाद तथा कल्लू की पत्नी चुनाव मैदान में है ये सभी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे है।
बांदा जिले महुआ किवास खण्ड के अन्तर्गत पनगार सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है जहां ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा हैं। पनगरा ग्राम पंचायत विभिन्न पदों के आरक्षण के अनुसार अनुसूचित जाति महिला के लिये आरक्षित है जिसमें गॉव मे स्थायी रहने वाले लोगों के अलावा कई ऐसे उम्मीदवार अपनी-अपनी पित्नयों को खड़ा किये है जो वशोZ से दिल्ली, पंजाब और सूरत में रोजी रोटी कमाने के लिये गये थे और वही बस गये।
पनगरा ग्राम पंचायत में पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिये कुल 22 महिलायें प्रधान पद की उम्मीदवार है जिसमें सबसे अधिक 8 प्रत्याशी चमार बिरादरी क है, 6-6 प्रत्याशी कोरी और धोबी बिरादरी के तथा 2 प्रत्याशी वाल्मीक समाज के है। इनमें सबसे अधिक संघशZ कोरी विरादरी में है। दसियों साल से दिल्ली में सपरिवार रहने वाले रामेश्वर कोरी विरादरी के ही है जो चुनाव लड़ने के लिये बच्चों सहित आ गये है और प्रधान पद के लिये अपत्नी को उम्मीदवार बना दिया हैं। ओमप्रकाश उर्फ मुन्ना पनगरा के चलते पुर्जा और समाज में अच्छी पैठ रखने वाले बाकर का नाती है जो कानपुर, बम्बई, सूरत घूमता रहा है और चुनाव के आकशZण में गॉव आ गया है।
कोरी बिरादरी को ब्राहा्रण समाज का समर्थन मिलने के कारण नत्थू की पत्नी सुन्दी की स्थिति काफी सुदृढ़ दिखायी देती है जो `बाकर´ के छोटे भाई जमुना प्रसाद का लड़का है। अन्य उम्मीदवारों में िशवप्रसाद पुत्र रामटहलू (बाकर के बहिने के नाती) रामकिशुन बाकर के अन्य बहिन के लड़के के दमाद तथा कल्लू की पत्नी चुनाव मैदान में है ये सभी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे है।
केंद्र से आई राशि का दुरूपयोग हो रहा है: राहुल गांधी
भोपाल। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने आज आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत मध्यप्रदेश में भेजे जाने वाली धनराशि का ठीक ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा है और इसकी पड़ताल के लिए एक कमेटी बनाई गई है।
गांधी ने यहां पत्रकारों से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड के विकास के लिए विशेष पैकेज देने के अलावा अनेक योजनाओं के तहत इस राज्य में पैसा भेजा जा रहा है। लेकिन उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है। युवा नेता ने कहा कि बुंदेलखंड अंचल का दौरा करने के बाद उन्होंने पाया कि यह अंचल काफी पिछड़ा हुआ है। इसके संबंध में उन्होंने केंद्र सरकार से चर्चा की और फिर विशेष पैकेज स्वीकृत हुआ था। हालाकि उन्होंने जांच के लिए कमेटी के गठन के संबंध में विस्तार से जानकारी नहीं दी।
कांग्रेस संगठन से जुडे सवालों के जवाब वह टाल गए और उन्होंने कहा कि उनका काम सिर्फ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और भारतीय युवा कांग्रेस से संबंधित काम देखना है। वह उन्हीं पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं को चमचागिरी नहीं करने की नसीहत देने संबंधी सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बात भी उन्होंने युवा कांग्रेस के परिप्रेक्ष्य में कही है। गांधी ने दावा करते हुए कहा कि एनएसयूआई और भारतीय युवा कांग्रेस के चुनाव पूर्ण पारदर्शिता के साथ हो रहे हैं और इसमें पूर्ण आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनायी जा रही है।
शेष राज्यों में भी युवा कांग्रेस के चुनाव जल्दी पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऎसा किसी राजनीतिक दल में पहली बार हो रहा है कि पूर्ण पारदर्शिता के साथ चुनाव हो रहे हैं और ऊपर से किसी नेता को थोपा नहीं जा रहा है।
गांधी ने यहां पत्रकारों से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड के विकास के लिए विशेष पैकेज देने के अलावा अनेक योजनाओं के तहत इस राज्य में पैसा भेजा जा रहा है। लेकिन उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है। युवा नेता ने कहा कि बुंदेलखंड अंचल का दौरा करने के बाद उन्होंने पाया कि यह अंचल काफी पिछड़ा हुआ है। इसके संबंध में उन्होंने केंद्र सरकार से चर्चा की और फिर विशेष पैकेज स्वीकृत हुआ था। हालाकि उन्होंने जांच के लिए कमेटी के गठन के संबंध में विस्तार से जानकारी नहीं दी।
कांग्रेस संगठन से जुडे सवालों के जवाब वह टाल गए और उन्होंने कहा कि उनका काम सिर्फ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और भारतीय युवा कांग्रेस से संबंधित काम देखना है। वह उन्हीं पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं को चमचागिरी नहीं करने की नसीहत देने संबंधी सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बात भी उन्होंने युवा कांग्रेस के परिप्रेक्ष्य में कही है। गांधी ने दावा करते हुए कहा कि एनएसयूआई और भारतीय युवा कांग्रेस के चुनाव पूर्ण पारदर्शिता के साथ हो रहे हैं और इसमें पूर्ण आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनायी जा रही है।
शेष राज्यों में भी युवा कांग्रेस के चुनाव जल्दी पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऎसा किसी राजनीतिक दल में पहली बार हो रहा है कि पूर्ण पारदर्शिता के साथ चुनाव हो रहे हैं और ऊपर से किसी नेता को थोपा नहीं जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि बुंदेलखंड में सामंतवाद है सबसे बड़ी अड़चन
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गांधी राष्ट्रीय खेल प्राधिकरण के स्टेडियम में दलित युवा नेतृत्व विकास सम्मेलन में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में बदलाव के लिए देश को युवाओं की जरूरत है इसलिए मध्यप्रदेश के युवाओं से भी आग्रह है कि वे कांग्रेस के सदस्य बन कर इस आंदोलन से जुडे़। उन्होने युवक कांग्रेस के चुनाव की पूरी प्रक्रिया युवाओं को समझाई। राज्य में युवा कांग्रेस के सदस्यता अभियान को गति देने के उद्देश्य से आए गांधी ने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमता दिखानी होगी। उन्हें अपने क्षेत्र में बेहतर काम करना होगा। पार्टी स्तर पर वह इसका ईमानदारी से आकलन कराएंगे और हुनरवान युवाओं को आगे बढा़या जाएगा। गांधी ने कहा कि युवा कांग्रेस संगठन चुनाव में आपराधिक तत्वों को भी कोई स्थान नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में चुनाव हो चुके हैं और गड़बड़ियों तथा फर्जी प्रमाणपत्र पेश करने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन पर कार्रवाई की गई है। गुटबाजी से हारे-राहुल गांधी ने कहा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस का हमेशा गढ़ रहा है। यहां हार का कारण कांग्रेस की आपसी गुटबाजी है। यदि आपस में लड़े तो हमेशा ही इसका लाभ अन्य पार्टी को मिलेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस में भितरघात करने वाले नेता और कार्यकर्ताओं को कोई जगह नहीं दी जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार दरअसल बुंदेलखंड अंचल से आए युवाओं ने राज्य के कांग्रेस संगठन में व्याप्त कथित गुटबाजी और राजनीति में आपराधिक तत्वों के हावी होने संबंधी सवाल उठाए थे। गांधी ने कहा कि चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। यदि कोई गड़बडी़ करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। राहुल के सामने उभरी गुटबाजी-दरअसल संवाद के दौरान ही एनएसयुआई के पूर्व प्रदेश सचिव राहुल तिवारी ने पार्टी के स्थानीय बड़े नेताओं के द्वारा उन्हें काम नहीं करने देने, और झूठे पुलिस केस में फंसाने का आरोप लगाया। इस पर दूसरे गुट के युवा खड़े हो गए और राहुल पर सामने ही झूठा आरोप लगाने की बात कहने लगे। दोनों तरफ से युवाओं के खड़े होकर शोर-शराबा करने पर राहुल गांधी मंच से उठे और अग्रिम पंक्ति में बैठे युवाओं से हाथ मिलते हुए कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले गए। बुंदेलखंड में सामंतवाद है सबसे बड़ी अड़चन-राहुल गांधी ने कहा कि बुंदेलखंड में सामंतवाद का बोलबाला होने के कारण उपेक्षित वर्ग की बात उन तक नहीं पहुंचती थी। इसी वजह से वे सीधा संवाद स्थापित करने के लिए यहां आए हैं। अब कोई वाद नहीं चलेगा। गांधी ने कहा कि पहले संगठन पर ताकतवर नेताओं की सिफारिशों से लोगों को पद दिए जाते थे। इससे दलित वर्ग की बात उच्च स्तर तक नहीं पहुंचती थी। काम के आधार पर किसी की सिफारिश के बगैर पद दिए जाएंगे। कार्यकर्ता की योग्यता ही उसका भविष्य तय करेगी। भितरघात करने वालों की अब खैर नहीं- सोमवार को दोपहर करीब 12.10 बजे राहुल गांधी टीकमगढ़ पहुंचे। नारायणदास खरे स्टेडियम में आदिवासी युवाओं से करीब 25 मिनट तक बातचीत की। इसके बाद वे युवा कांग्रेस के मंच पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि भितरघात करने वालों को पांच मिनट में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उमा को हराना बड़ी बात नहीं -विधानसभा चुनाव में उमा भारती को हराने की शेखी बघार रहे एक कार्यकर्ता को राहुल गांधी की फटकार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उमा भारती को हराना कोई बड़ी बात नहीं है। यदि युवा कांग्रेस एकजुट होकर खड़ी हो जाए तो प्रदेश में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंका जा सकता है। नेताओं को नहीं मिली इंट्री -राहुल गांधी के दोनों कार्यक्रमों में स्वागत-सम्मान की कोई औपचारिकताएं नहीं हुईं। श्री गांधी मंच पर रखीं सामान्य फाइवर कुर्सियों पर बैठे और सीधा संवाद शुरू किया। श्री गांधी के साथ आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी अनुसूचित जाति के कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। यहां वे मंच पर बैठे रहे पर कुछ नहीं बोले। इसके अलावा किसी भी नेता को कार्यक्रमों में प्रवेश नहीं मिला। युकां के कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष को भी इंट्री नहीं मिली। राहुल गांधी के साथ राष्ट्रीय युकां अध्यक्ष राजीव साटव, सचिव जीतेंद्र सिंह बघेल मौजूद रहे। पैकेज का दुरुपयोग का आरोप -राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिछले दौरे के अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार से बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज दिलाया है। लेकिन प्रदेश सरकार पैकेज में मिली राशि का दुरुपयोग कर रही है। इसलिए इस राशि के सदुपयोग के लिए हमें प्रदेश सरकार को उखाड़ फेंकना होगा। उड़द की फसल चौपट होने की जानकारी दी -हैलीपेड पर राहुल गांधी का स्वागत करने पहुंचे पूरे संभाग के करीब दो दर्जन कांग्रेस नेताओं को उनके आने और जाने पर सिर्फ हाथ मिलाने और अपना परिचय देने का ही मौका मिल सका। इसी दौरान युकां अध्यक्ष नवीन साहू, प्रकाश दांगी और प्रियंका घुवारा ने श्री गांधी को जिले में नकली उड़द बीज किसानों को दिए जाने के कारण किसानों को हुए नुकसान के संबंध में जानकारी दी। हैलीपेड पर विधायक यादवेंद्र ङ्क्षसह, बृजेंद्र सिंह, अरुणोदय चौबे, गोविंद सिंह, जिलाध्यक्ष रवींद्र अध्वर्यु, जगदीश शुक्ला, विंद्रावन अहिरवार, विश्वजीत सिंह और इसराइल खान, नितिन चतुर्वेदी मौजूद रहे। राहुल की यात्रा से शिवराज को याद आए किसान- कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बुंदेलखंड की प्रस्तावित यात्रा से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यहां के किसानों की चिंता सताने लगी है। मुख्यमंत्री खुद किसानों की सुध लेने के लिए छतरपुर के घिनोची गांव जा पहुंचे। इस गांव में खराब बीज के कारण किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। इलाके के चालीस हजार किसान अपनी फसल गंवा चुके हैं। जो बीज ड़ाला गया,उसका पौधा तो दस फीट का हो गया,लेकिन फली नहीं आई। छतरपुर राज्य के बुंदेलखंड इलाके का पिछड़ा हिस्सा है। राहुल गांधी की सोमवार से प्रस्तावित मध्यप्रदेश यात्रा में बुंदेलखंड जाने का कार्यक्रम भी है। यद्यपि राहुल गांधी का छतरपुर जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है। वे समीपवर्ती जिला टीकमगढ़ में जा रहे है। लेकिन, मध्यप्रदेश सरकार को यह आशंका जरूर है कि राहुल गांधी छतरपुर भी जा सकते हैं? संभवत: यही वजह है कि मुख्यमंत्री चौहान ने छतरपुर की ओर कूच कर लिया। मुख्यमंत्री सीधे खेत की मेड़ पर पहुंचे। वहीं उन्होंने किसानों से बात की। मुख्यमंत्री के तेवर सख्त थे। उन्होंने उड़द और तिल पैदा करने वाले किसानों की बदहवासी देखी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार बुंदेलखंड के इस इलाके में प्रारंभिक तौर पर जो सर्वे किया गया है उसके पाचों जिलों में 2 लाख 60 हजार 300 हेक्टर क्षेत्र में फसल बोई गई है। इससे लगभग 40 हजार कृषक प्रभावित हुये है। केवल छतरपुर जिले में लगभग 20 हजार कृषकों को 6 करोड़ 85 लाख रूपये की हानि होने की संभावना है। किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। सरकार को इस बात की खबर पहले से थी। लेकिन, मुख्यमंत्री के माथे पर बल राहुल गांधी का बुंदेलखंड का कार्यक्रम बनने के बाद आए। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि वे परेशान व चिन्तित न हो, उड़द व तिल की फसलों में जो अफलन की स्थिति निर्मित हुई है,उसके दोषी बीज बेचने वाले हैं। जिन संस्थाओं ने गलत बीज दिया है उनके विरूद्व किसान पुलिस थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कराये। इसके बाद ही राज्य सरकार किसानों के प्रतिनिधि के रूप में उपभोक्ता फोरम में जाकर कानूनी लड़ाई लड़ेगी तथा उनकी फसलों का पूरा-पूरा मुआवजा दिलवायेगी। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद पुलिस महानिरीक्षक अन्वेष मंगलम् को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करे कि किसान खराब बीज देने वाली संस्थाओं के विरूद्व थाने में रिपोर्ट लिखवाने के लिये जायें तो उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े। मुख्यमंत्री को बताया गया कि बीज मध्यप्रदेश सरकार के कृषि विभाग ने भारत सरकार संस्था के माध्यम से खरीदा था। बताया गया कि छतरपुर के अलावा बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी किसान खराब बीज के कारण अपनी फसल गंवा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सागर के संभागायुक्त एस.के.वेद को सभी जिलों में फसल का सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। संभाग में कुल पांच जिले छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर एवं दमोह हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रभावित किसानों को तत्काल राहत दिलाने के लिये म.प्र. राजस्व पुस्तिका के परिपत्र में संशोधन कर अफलन की स्थिति को प्राकृतिक आपदा घोषित करके तत्काल सहायता राशि प्रदान की जायेगी। |
Monday, October 4, 2010
Ayodhya Hindu Muslim
किसी ने कुछ बनाया था, किसी ने कुछ बनाया है,
कहीं मंदिर की परछाई, कहीं मस्जिद का साया है,
न तब पूछा था हमसे, ना अब पूछने आये,
हमें फुर्सत कहाँ, रोटी की गोलाई के चक्कर से,
ना जाने किसका मंदिर है, ना जाने किसकी मस्जिद,
ना जाने किसकी साजिश है, ना जाने किसकी जिद है,
अजब सा सिलसिला है, जाने किसने चलाया है
कहीं मंदिर की परछाई, कहीं मस्जिद का साया है,
न तब पूछा था हमसे, ना अब पूछने आये,
हमें फुर्सत कहाँ, रोटी की गोलाई के चक्कर से,
ना जाने किसका मंदिर है, ना जाने किसकी मस्जिद,
ना जाने किसकी साजिश है, ना जाने किसकी जिद है,
अजब सा सिलसिला है, जाने किसने चलाया है
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